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जिस पल जवाब चाहिए, उसी पल जवाब देता है

सामने वाला पिछले साल की शर्तें पूछ रहा है। फ़ाइल कहीं है, पर अभी ढूँढ़ी नहीं जा सकती। Whisperer वह सवाल सुनता है और आपके ज्ञान भंडार से जवाब बनाकर स्क्रीन पर रख देता है — कुछ सेकंड में, सिर्फ़ आपके लिए।

हर महीने 60 मिनट मुफ़्त · कार्ड की ज़रूरत नहीं

कुछ सेकंड

इतने कि बातचीत की लय न टूटे।

अपने दस्तावेज़ों से

सामान्य ज्ञान नहीं — आपकी अपनी फ़ाइल के आँकड़े।

सिर्फ़ आपको

स्क्रीन आपके मॉनिटर के भीतर ही रहती है।

बाज़ार में अभी

हिंदी में मिलने वाले ज़्यादातर टूल «बाद वाले» हैं

हिंदी में खोजने पर जो सेवाएँ ऊपर आती हैं, उनमें से लगभग सब एक ही ढंग से चलती हैं: रिकॉर्डिंग अपलोड कीजिए, कुछ देर बाद टेक्स्ट और सारांश लीजिए। बोलते समय मदद करने वाला कुछ नहीं होता। हमारी जगह ठीक वहीं है।

बाद में समेटने वाले टूल कीमत बाद में आती है
  • मीटिंग ख़त्म होने पर सारांश मिलता है
  • कॉल के दौरान कोई मदद नहीं
  • अगली मीटिंग बेहतर करने के काम आता है
Whisperer कीमत अभी आती है
  • सवाल सुनकर कुछ सेकंड में जवाब
  • जवाब के साथ स्रोत दस्तावेज़ दिखता है
  • इसी मीटिंग को बचाने के काम आता है

जो नहीं होता

साफ़-साफ़ तीन बातें

पहली एक बार में एक रिकॉर्डिंग, पूरा संग्रह नहीं

तैयार रिकॉर्डिंग अपलोड की जा सकती है: «मीटिंग» सेक्शन 25 MB तक की एक फ़ाइल लेता है — mp3, m4a, wav, ogg, flac, aac, और साथ ही mp4 व webm, जिनसे ऑडियो ट्रैक लिया जाता है। जो नहीं है, वह है पूरे संग्रह की एकमुश्त अपलोड; और यह उतने ही मिनट ख़र्च करती है जितने लाइव कॉल।

दूसरी ज्ञान भंडार ख़ाली हो तो जवाब भी पतला होगा

जवाब आपके दस्तावेज़ों से बनते हैं। कुछ डाला ही न हो तो सिर्फ़ सामान्य बातें निकलेंगी। पहले वे फ़ाइलें डाल दीजिए जिन्हें बार-बार देखना पड़ता है।

तीसरी आपकी जगह बोलता नहीं है

स्क्रीन पर जवाब आता है, बस। न आवाज़ निकलती है, न सामने वाले तक कुछ जाता है। पढ़कर कहना आदमी का काम है — और हिंदी-अंग्रेज़ी मिली बातचीत में एक बार पढ़ लेना और भी ज़रूरी है।

आम सवाल

सबसे पहले यही पूछा जाता है

जवाब ग़लत निकला तो

साथ में स्रोत दस्तावेज़ दिखता है। खोलकर मूल पंक्ति देख लीजिए, फिर बोलिए।

बात रोके बिना इस्तेमाल हो सकता है

यह स्क्रीन उसी के लिए बनी है। सवाल टाइप किए बिना भी, बातचीत में आया सवाल पकड़कर जवाब तैयार कर लेता है।

हिंदी मीटिंग में ठीक चलेगा

चलेगा, पर शुरू करने से पहले सत्र की भाषा हिंदी चुन लीजिए। और अगर वाक्यों में अंग्रेज़ी घुली रहती है तो सटीकता कम रहेगी — यह हम छिपाते नहीं।

वह मीटिंग याद कीजिए जहाँ जवाब नहीं दे पाए

उस वक़्त फ़ाइल सामने होती तो बात कैसे जाती — यही इस सुविधा की क़ीमत है।